Fiction
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SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: David Foenkinos (Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2016
- Pages: 264 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350643375
- ISBN-13 :9789350643372
DESCRIPTION:
नैटेली अपनी ज़िन्दगी से बेहद खुश है। अपने काम में सफल है और अपने पति के साथ सुखी जीवन बिता रही है। लेकिन अचानक जब उसका पति एक कार दुर्घटना में मारा जाता है तो उसकी हँसती-खेलती दुनिया एकदम वीरान और उदास हो जाती है। कई बरस बीत जाते हैं, और फिर एक दिन, यूँ ही बिना कुछ सोचे-समझे वह अपने साथ काम कर रहे मार्कस को चुम्बन देती है। मार्कस नैटेली को चाहने लगता है। लेकिन नैटेली अपने ही गम की दुनिया में डूबी है....क्या मार्कस नैटेली को यह विश्वास दिला सकेगा कि वह उसके जीवन में फिर से प्यार की बहार ला सकता है? क्या नैटेली उसकी मुहब्बत को कबूल कर पायेगी...दो दिलों की कशमकश में डूबते-उतरते प्यार की कहानी है नज़ाकत। 2009 में प्रकाशित इस पुस्तक La Delicatesse को आलोचकों और पाठकों, दोनों ने ही सराहा और दस पुरस्कारों से नवाज़ा गया। डेविड फाॅन्किनोस का जन्म 28 अक्टूबर 1974 को पेरिस में हुआ था और साहित्य और संगीत की शिक्षा उन्होंने पेरिस में ही प्राप्त की। उनकी पहली पुस्तक 2002 में प्रकाशित हुई थी। उनके अन्य लोकप्रिय उपन्यास हैं Charlotte और La Potential Erotique de ma Femme। एक लेखक होने के साथ वह एक संगीतकार भी हैं और फ़िल्मों की पटकथा भी लिखते हैं।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: M. Ellin (Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2013
- Pages: 100 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170284341
- ISBN-13 :9788170284345
DESCRIPTION:


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Alexander Dumas (Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2016
- Pages: 80 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8174830243
- ISBN-13 :9788174830241
DESCRIPTION:
अलेक्ज़ेंडर ड्यूमा के प्रसिद्ध उपन्यास 'थ्री मस्केटियर्स' का सरल हिंदी रूपांतरण हम पढ़ सकते हैं।


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Alexander Dumas (Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2016
- Pages: 80 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8174830154
- ISBN-13 :9788174830159
DESCRIPTION:


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Indira Dangi (Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2017
- Pages: 240 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9386534193
- ISBN-13 :9789386534194
DESCRIPTION:
साहित्यिक चकाचौन्ध से आकर्षित एक दलित नौजवान साहित्य की दुनिया में अपना सिक्का जमाने के लिए दिल्ली आ पहुँचता है। एक छोटे शहर से आये, विराट को जल्द ही समझ आने लगता है कि इस प्रतिस्पर्धी माहौल में सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ने के लिए लेखन-प्रतिभा के अतिरिक्त और भी बहुत कुछ चाहिए। साहित्यिक राजनीति, पुरस्कारों के लिए दाँवपेंच और लालफीताशाही को करीब से अनुभव कर विराट का मोहभंग हो जाता है और अपने शहर दतिया जाने वाली ट्रेन में बैठकर वह अपना पहला उपन्यास लिखना शुरू करता है - रपटीले राजपथ। पिछले कुछ वर्षों में इंदिरा दाँगी को उनके लेखन के लिए कई पुरस्कारों से नवाज़ा गया है जिनमें उल्लेखनीय हैं – ‘भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन अनुशंसा पुरस्कार २०१४’ और ‘दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय पुरस्कार २०१५’। उनकी अभी तक पाँच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें उपन्यास और कहानी संकलन शामिल हैं। कई भाषाओं की जानकार इंदिरा दाँगी ने मौलिक लेखन के अलावा अन्य भाषाओं में कहानियों का अनुवाद भी किया है।


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Dandi (Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2018
- Pages: 144 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170287715
- ISBN-13 :9788170287711
DESCRIPTION:
संस्कृत साहित्य में महाकवि दण्डी का विशिष्ट स्थान है। ‘दशकुमारचरित’ उनकी लोकप्रिय व प्रसिद्ध रचना है। इसमें दस कुमारों के माध्यम से उस समय के समाज के सभी वर्गों-राजमहलों से लेकर आम जन-जीवन तक का रोचकतापूर्ण विस्तृत वर्णन है। ‘दशकुमारचरित’ में यथार्थवाद अपनी अभिव्यक्ति में बहुत ही निर्मम बनकर उतरा है। प्रतिष्ठित साहित्यकार रांगेय राघव ने रोचक शैली में इसका प्रभावशाली रूपान्तर किया है।


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Acharya Chatursen (Author)
- Binding :Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2012
- Pages: 144 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350640511
- ISBN-13 :9789350640517
DESCRIPTION:
हिन्दी के कथाकारों में आचार्य चतुरसेन का महत्त्वपूर्ण स्थान है। आचार्य जी ने मुग़लकालीन तथा ब्रिटिश इतिहास का अध्ययन विशेष रूप से किया था। तत्कालीन राजघरानों से उनका निकट का संबंध रहा था, इनको आधार बनाकर उन्होंने सैंकड़ों कहानियाँ तथा अनेक उपन्यास लिखे जो आज भी सार्थक हैं। साथ ही, सामाजिक विषयों पर उत्कृष्ट कहानियाँ भी लिखीं। प्रस्तुत संकलन की कहानियाँ उन्होंने स्वयं पसंद कीं और उन पर टिप्पणियाँ भी लिखी हैं।


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Acharya Chatursen (Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2017
- Pages: 128 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 93506405210
- ISBN-13 :9789350640524
DESCRIPTION:
हिन्दी के कथाकारों में आचार्य चतुरसेन का महत्त्वपूर्ण स्थान है। आचार्य जी ने मुग़लकालीन तथा ब्रिटिश इतिहास का अध्ययन विशेष रूप से किया था। तत्कालीन राजघरानों से उनका निकट का संबंध रहा था, इनको आधार बनाकर उन्होंने सैंकड़ों कहानियाँ तथा अनेक उपन्यास लिखे जो आज भी सार्थक हैं। साथ ही, सामाजिक विषयों पर उत्कृष्ट कहानियाँ भी लिखीं। प्रस्तुत संकलन की कहानियाँ उन्होंने स्वयं पसंद कीं और उन पर टिप्पणियाँ भी लिखी हैं।


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Ashok Chakradhar Author)
- Binding :Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2013
- Pages: 120 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170289718
- ISBN-13 :9788170289715
DESCRIPTION:
चाहे कोई साधारण-सी रोज़मर्रा की बात या घटना हो, लेकिन जब हास्य-व्यंग्यकार अशोक चक्रधर उस पर व्यंग्य की स्याही में डूबी अपनी कलम चलाते हैं तो वही घटना अनूठी और यादगार बन जाती है। जीवन के चमन में से चुनी हुई कुछ ऐसी ही घटनाओं के व्यंग्यात्मक फूल इस पुस्तक में प्रस्तुत हैं।


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Ashok Chakradhar Author)
- Binding :Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2015
- Pages: 120 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170289610
- ISBN-13 :9788170289616
DESCRIPTION:
चाहे कोई साधारण-सी रोज़मर्रा की बात या घटना हो, लेकिन जब हास्य-व्यंग्यकार अशोक चक्रधर उस पर व्यंग्य की स्याही में डूबी अपनी कलम चलाते हैं तो वही घटना अनूठी और यादगार बन जाती है। जीवन के चमन में से चुनी हुई कुछ ऐसी ही घटनाओं के व्यंग्यात्मक फूल इस पुस्तक में प्रस्तुत हैं।


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Miguel De Cervantes(Author)
- Binding : Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2016
- Pages: 80 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8174830340
- ISBN-13 :9788174830340
DESCRIPTION:
तीसमार खां


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Abdul Bismillah(Author)
- Binding : Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2017
- Pages: 128 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 93865340710
- ISBN-13 :9789386534071
DESCRIPTION:
भारतीय समाज के बदलते यथार्थ के नए चित्र बेहद रोचक ढंग से अब्दुल बिस्मिल्लाह ने अपनी इन कहानियों में प्रस्तुत किये हैं। जीवन के संघर्ष के कठिन और प्रेरणादायी प्रसंग इनमें बहुधा आये हैं। और लेखक की निगाह समाज के सभी कोनों, अंतरों में बराबर जाती है जहाँ सामाजिक सरोकारों से वे अपनी रचनाशीलता को अलग नहीं होने देते वहाँ भी किस्सागोई का शुद्ध भारतीय ढंग इन कहानियों को अपनी धरोहर बना लेता है। कथा रस के साथ यथार्थ की ये युगलबंदी ही हिन्दी कहानी में अब्दुल बिस्मिल्लाह की उपस्तिथि को विशेष बनाती है।


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Bhavbhuti (Author)
- Binding : Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2017
- Pages: 96 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170287790
- ISBN-13 :9788170287797
DESCRIPTION:
महाकवि भवभूति द्वारा रचित उत्तररामचरित संस्कृत साहित्य की अमूल्य निधि है। रामायण के (उत्तरकाण्ड) कथानक को लेकर भवभूति ने अपनी प्रतिभा का सृजन किया। सार्थकता और संवादों की स्वाभाविकता इस नाटक की प्रमुख विशेषता है। मानवहृदय की वेदना को भवभूति ने बड़ी ही खूबसूरती से व्यक्त किया है। अपने पति श्रीराम द्वारा त्यागी गई सीता का मार्मिक वर्णन पढ़कर पाठक बरबस भावुक हो उठता है।


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Shanti Bhattacharya
- Binding : Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2012
- Pages: 56 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170283345
- ISBN-13 :9788170283348
DESCRIPTION:
Rajasthan Ki Lok Kathayen


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Rajendra Mohan Bhatnagar
- Binding : Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2018
- Pages: 376 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170281512
- ISBN-13 :9788170281511
DESCRIPTION:
महात्मा बुद्ध के बाद यदि किसी महापुरुष ने धर्म, समाज, राजनीति और आर्थिक धरातल पर सामाजिक क्रांति से साक्षात्कार कराने का सार्थक प्रयास किया तो वह थे-डा. भीमराव अंबेडकर। उनका सूर्य-सदृश तेजस्वी चरित्र, चंद्रमा जैसा सम्मोहक व्यवहार, ऋषियों जैसा गहन गम्भीर ज्ञान, संतों जैसा उत्सर्ग-बल और शांत स्वभाव उनके चरित्र के विभिन्न पहलू थे। उन्होंने अपना सारा जीवन समाज के उपेक्षित, दलित, शोषित और निर्बल वर्गों को उन्नत करने में लगा दिया था। सच्ची घटनाओं पर आधारित, यह जीवनीपरक उपन्यास वर्तमान पीढ़ी को निराशा और दिशाहीनता की स्थिति से ऊपर उठाकर एक जीवंत चेतन धारा से जोड़ने की दिशा में विशेष भूमिका निभाएगा। ‘युगपुरुष अंबेडकर’ के लेखक राजेन्द्र मोहन भटनागर हिन्दी के सुपरिचित और सुप्रतिष्ठित लेखक हैं। अनेक महान् पुरुषों की जीवनियां प्रस्तुत कर वे जीवनी-विधा को भी समृद्ध करते रहे हैं। यह उनकी विशिष्ट कृति है।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Rajendra Mohan Bhatnagar
- Binding : Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2010
- Pages: 304 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170286557
- ISBN-13 :9788170286554
DESCRIPTION:
यह उपन्यास श्री अरविन्द की साधना का प्रेरक, जीवंत चित्रण है तथा उनकी अलौकिक अनुभूतियों और दिव्य जगत का अंतरपट खोलता है। साथ ही, जीवन के अनेक प्रश्नों के मर्म पर से पर्दा हटाता है।


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Rajendra Mohan Bhatnagar
- Binding : Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2018
- Pages: 268 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 81702850210
- ISBN-13 :9788170285021
DESCRIPTION:
‘भारत की माटी मेरा स्वर्ग है, ‘भारत का कल्याण ही मेरा कल्याण है’ फेंक दे यह शंख बजाना, छोड़ दे प्रशस्ति गान करना यदि तेरे पास दो वक्त की रोटी न हो’-ये शब्द उस तेजस्वी संन्यासी के हैं जो हमारी सांस्कृतिक तथा राजनीतिक स्वाधीनता के जनक थे। भारतीय नवजागरण के अग्रदूत स्वामी विवेकानन्द के विलक्षण प्रभावी जीवन पर आधारित सांस्कृतिक उपन्यास।


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Rajendra Mohan Bhatnagar
- Binding : Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2018
- Pages: 268 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170284287
- ISBN-13 :9788170284284
DESCRIPTION:
‘भारत की माटी मेरा स्वर्ग है, ‘भारत का कल्याण ही मेरा कल्याण है’ फेंक दे यह शंख बजाना, छोड़ दे प्रशस्ति गान करना यदि तेरे पास दो वक्त की रोटी न हो’-ये शब्द उस तेजस्वी संन्यासी के हैं जो हमारी सांस्कृतिक तथा राजनीतिक स्वाधीनता के जनक थे। भारतीय नवजागरण के अग्रदूत स्वामी विवेकानन्द के विलक्षण प्रभावी जीवन पर आधारित सांस्कृतिक उपन्यास।


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Rajendra Mohan Bhatnagar
- Binding : Paperback
- Language : Hindi
- Edition :2017
- Pages: 320 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 9350640090
- ISBN-13 :9789350640098
DESCRIPTION:
भारत की एकमात्र महिला प्रधानमन्त्री रहीं इन्दिरा गाँधी के जीवन पर आधारित है लेखक राजेन्द्र मोहन भटनागर की यह पुस्तक। यह इन्दिरा गाँधी की 67 सालों की उथल-पुथल भरी, घटनापूर्ण ज़िन्दगी की गाथा है जो इस बात पर प्रकाश डालती है कि एक संकोची, एकान्त पसन्द, गुमसुम रहने वाली लड़की में ऐसी कौन सी विलक्षणताएँ थीं जिनके कारण वह दो बार देश की प्रधानमन्त्री चुनी गयीं। बैंकों के राष्ट्रीयकरण, बांग्लादेश के जन्म, एमरजेंसी, और ब्लू-स्टार ऑपरेशन जैसे ऐतिहासिक निर्णयों से जहाँ इन्दिरा गाँधी की छवि एक दबंग, निष्ठुर नेता की थी वहीं अपने व्यक्तिगत जीवन में वह संवेदनशील, कला और संस्कृति की परख रखने वाली, ज़िन्दगी की हर छोटी-से-छोटी बात पर ध्यान देनेवाली महिला और ममतामयी माँ थीं। उनके जीवन के इन सभी पहलुओं को एक साथ बुनकर लेखक ने एक रोचक और पठनीय जीवनी का सृजन किया है। राजस्थान साहित्य अकादमी के सर्वोच्च सम्मान ‘मीरा पुरस्कार’ और ‘विशिष्ट साहित्यकार सम्मान’ आदि पुरस्कारों से सम्मानित राजेन्द्र मोहन भटनागर अपने ऐतिहासिक उपन्यासों के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। युगपुरुष अंबेडकर, विवेकानन्द, सरदार, दलित संत, गौरांग और कुली बैरिस्टर उनकी कुछ लोकप्रिय रचनाएँ हैं।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Rajendra Mohan Bhatnagar
- Binding : Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2019
- Pages: 312 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170285054
- ISBN-13 :9788170285052
DESCRIPTION:
सरदार' यानी भारत के बिस्मार्क, लौहपुरुष सरदार पटेल का भारत के राष्ट्रीय आंदोलन तथा स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद देश के निर्माण में जो केंद्रीय तथा ठोस योगदान रहा, वह तब तक याद किया जाता रहेगा जब तक भारत राष्ट्र एक बार फिर सुदृढ़, शक्तिशाली तथा शत्रु-शक्तियों से लोहा लेने में समर्थ नहीं हो जाता। आजादी के बाद बहुत जल्द उनका देहांत देश को मझधार में खड़ा छोड़ गया और पचास वर्ष बाद भी उसमें परिवर्तन होता नजर नहीं आ रहा- जो आज एक बार फिर उनके जीवन तथा गुणों को याद करने का कारण बन गया है। इस उद्देश्य से जीवनीपरक उपन्यासों के प्रख्यात लेखक राजेंद्रमोहन भटनागर ने सरदार पटेल के जीवन पर इस उपन्यास की रचना की है। यह बड़ी कुशलता से उस महान तेजस्वी और प्रखर व्यक्तित्व के सभी पक्षों को अंकित करता है। आज के सभी भारतीयों के लिए यह उपन्यास अवश्य पठनीय और प्रेरणा तथा स्फूर्तिदायी है। उपन्यास की शैली में लिखित यह संभवतः सरदार पटेल पर पहला और अकेला उपन्यास है।


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Rajendra Mohan Bhatnagar
- Binding : Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2017
- Pages: 368 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170280494
- ISBN-13 :9788170280491
DESCRIPTION:
‘नीले घोड़े का सवार’ सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यासकार डा. राजेन्द्रमोहन भटनागर कृत प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप को लेकर लिखा गया अन्यतम उपन्यास है। यह उपन्यास अनवरत शोध का परिणाम है। आपको बहुत कुछ नया ज्ञात हुआ और नये की स्थापना करना अत्यन्त आवश्यक हो गया। यह उपन्यास न केवल अपने समय का जीवित दस्तावेज़ है अपितु तत्कालीन जनजीवन की सामाजिक, आर्थिक और आंशिक रूप से धार्मिक स्थिति को समझने में मदद करने वाला ग्रन्थ है। इसके द्वारा महाराणा प्रताप का एक सर्वथा जीवन्त मानवीय चरित्र सामने आता है। कथाकार ने इतिहास का सार्थक उपयोग किया है। कथा में रोचकता की वृद्धि हुई है और सांस्कृतिक-सामाजिक सरोकारों को ज़्यादा सार्थकता हासिल हुई है।-‘आजकल’। लेखक ने एक ओर इतिहास रस का परिपाक किया है तो दूसरी ओर रचना के माध्यम से प्रताप के जीवन-संघर्ष का उदात्तीकरण भी किया है।-‘नया शिक्षक’।


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Rajendra Mohan Bhatnagar
- Binding : Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2010
- Pages: 308 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170287448
- ISBN-13 :9788170287445
DESCRIPTION:
राजेन्द्र मोहन भटनागर का यह उपन्यास गाँधीजी के जीवन के उस बदलाव पर केन्द्रित है जिसने उन्हें एक सफल बैरिस्टर से महात्मा बना दिया। गाँधीजी विलायत से वकालत पढ़कर दक्षिण अफ्रीका गए तो थे बैरिस्टर बनने, बैरिस्टर वह बने भी और सफल भी हुए लेकिन वहाँ की रंगभेद की नीति ने उन्हें इतना द्रवित किया कि वह वैभव का जीवन छोड़कर अहिंसा और सत्याग्रह के रास्ते संघर्ष पर उतर आए। इसी राह ने उन्हें महात्मा भी बनाया। बेहद प्रभावशाली प्रस्तुति, रोचक भाषा-शिल्प ओर सहजता से ओत-प्रोत यह उपन्यास बार-बार पढ़े जाने लायक बन पड़ा है।

SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Rajendra Mohan Bhatnagar
- Binding : Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2009
- Pages: 320 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 8170288207
- ISBN-13 :9788170288206
DESCRIPTION:
चैतन्य महाप्रभु कृष्ण के अवतार माने गये है। 1486 में बंगाल के छोटे से गाँव में जन्मे चैतन्य महाप्रभु बचपन से ही बहुत प्रतिभाशाली थे। छोटी उम्र में ही उन्होंने सभी धार्मिक ग्रंथों का गहराई से अध्ययन कर उन्हें कण्ठस्थ भी कर लिया था। केवल अड़तालीस वर्ष के छोटे से जीवन काल में उन्हें अपने समय का सबसे महान और महत्त्वपूर्ण विद्वान् माना जाता था। देश भर में भ्रमण करके उन्होंने संकीर्तन और ‘हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे’ का मूल मंत्र का संदेश देश के कोने-कोने में फैलाया। कृष्ण भक्ति में लीन होकर कृष्ण का नाम भजना और साथ-साथ आनंद में नाचना, इसकी शुरुआत उन्होंने ही की और यही आज दुनिया के कोने-कोने में इस्कान (ISKON) के नाम से जाना जाता है। राजेन्द्र मोहन भटनागर ने अपनी इस कृति ‘गौरांग’ के माध्यम से चैतन्य महाप्रभु के जीवन का ऐसा सुन्दर एवं सजीव चित्रण किया है कि पाठक इसको पढ़ते समय यह अनुभव करता है कि वह चैतन्य महाप्रभु को अपने सामने चलता-फिरता और प्रवचन देता हुआ देख रहा है।


SPECIFICATION:
- Publisher : Rajpal and Sons
- By: Rajendra Mohan Bhatnagar
- Binding : Hardcover
- Language : Hindi
- Edition :2017
- Pages: 448 pages
- Size : 20 x 14 x 4 cm
- ISBN-10: 81702824210
- ISBN-13 :9788170282426
DESCRIPTION:
शीर्षस्थ स्वातंत्य योद्धा नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की अप्रतिम जीवन गाथा...अग्रणी राजनेताओं के औपन्यासिक जीवन-चरित्रों के सिद्ध लेखक राजेन्द्रमोहन भटनागर द्वारा।
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